आरक्षण नहीं होता

आरक्षण नहीं होता तो
बहुजनों के बच्चें
वंचित रह जाते पढ़ने से
उच्च शिक्षा से
प्राध्यापक , डॉक्टर 
इंजीनियर, वकील 
और अधिकारी बनने से
करनी पड़ती गुलामी
सवर्णों की
जोतने पड़ते खेत
उठाना पड़ता मैला
धोते रहते मवेशी
बुहार ते रहते जमीन
लुटाते रहते इज्जत
रोटी के ख़ातिर
जीने लगते जिंदगी
उधार की
अधिकार कहाँ था
आरक्षण अब अधिकार है
इसी अधिकार को पाने
उतर रहें हैं लोग
रास्ते पर
समानता के लिए ।

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